Jul 01, 2026

आधुनिक सैन्य नेतृत्व का विजन लेकर आए जनरल धीरज सेठ

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नई दिल्ली। भारतीय सेना के 31वें थल सेना प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद जनरल धीरज सेठ ने अपने पहले ही संबोधन में स्पष्ट कर दिया कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना का लक्ष्य केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भरता और संयुक्त सैन्य क्षमता के बल पर भविष्य की हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र “JAI” को आधार बनाते हुए भारतीय सेना के लिए नया विजन “JAI से VIJAY” प्रस्तुत किया, जिसे आने वाले समय में सेना की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं का मार्गदर्शक माना जा रहा है। अपने संबोधन की शुरुआत “जय हिंद” के उद्घोष से करते हुए जनरल धीरज सेठ ने इसे अपने जीवन का गर्व और विनम्रता का क्षण बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका निर्वहन वे Duty, Honour और Nation First के सिद्धांतों के अनुरूप पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करेंगे। उन्होंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा उन अमर शहीदों के साहस, त्याग और समर्पण से ही मजबूत बनी है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के सैनिकों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

कॉम्बैट रेडी और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार सेना
जनरल धीरज सेठ ने कहा कि भारतीय सेना आज एक Combat Ready और Battle Hardened Force है, जिसने विभिन्न परिस्थितियों में अपनी क्षमता और दक्षता को साबित किया है। हालांकि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, आधुनिक युद्ध तकनीकों और नई चुनौतियों को देखते हुए सेना के व्यापक आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इसलिए भारतीय सेना को Technology Enabled Future-Ready Army के रूप में विकसित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

‘VIJAY’ विजन के जरिए तय की भविष्य की रणनीति
अपने संबोधन में जनरल सेठ ने भारतीय सेना की भावी कार्ययोजना को “VIJAY” नामक पांच प्रमुख स्तंभों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
V – Vigilance (सतर्कता): उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा और उभरते सुरक्षा खतरों पर लगातार निगरानी बनाए रखना भारतीय सेना की पहली जिम्मेदारी होगी। इसके लिए सेना हर समय उच्च स्तर की ऑपरेशनल तैयारी बनाए रखेगी।
I – Innovation and Transformation (नवाचार एवं परिवर्तन): जनरल सेठ ने कहा कि आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए सेना में नवाचार और तकनीकी परिवर्तन आवश्यक हैं। नई युद्ध रणनीतियों, अत्याधुनिक हथियारों और डिजिटल तकनीकों को तेजी से अपनाकर सेना को और अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
J – Jointness and Integration (संयुक्तता एवं एकीकरण): उन्होंने तीनों सेनाओं—थल सेना, वायु सेना और नौसेना—के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही Military-Civil Fusion और Whole of Nation Approach के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में सेना की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही।
A – Atmanirbharta (आत्मनिर्भरता): जनरल धीरज सेठ ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों और हथियार प्रणालियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का लक्ष्य होगा कि अधिक से अधिक रक्षा उपकरण और तकनीक देश में ही विकसित हों, ताकि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने इसे “स्वदेशी समाधानों से युद्ध में विजय” का लक्ष्य बताया।
Y – Yodha First (योद्धा प्रथम): उन्होंने कहा कि सेना की सबसे बड़ी ताकत उसका सैनिक है। इसलिए अग्निवीरों, नियमित सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता, कल्याण और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। आधुनिक संसाधनों के साथ सैनिकों का मनोबल और कल्याण भी सेना की प्राथमिकता रहेगा।

पूर्व सेना प्रमुखों के योगदान को किया याद
अपने संबोधन के दौरान जनरल धीरज सेठ ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित सभी पूर्व आर्मी चीफ्स के योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की वर्तमान मजबूती उनके नेतृत्व और दूरदर्शी निर्णयों का परिणाम है, जिसे आगे बढ़ाना उनकी जिम्मेदारी होगी। नए सेना प्रमुख ने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारतीय सेना देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना हर चुनौती का मजबूती से सामना करेगी और राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।