Jun 29, 2026

उत्तराखंड शिक्षा विभाग में बड़े फेरबदल की तैयारी: निदेशक सहित कई शीर्ष पद खाली, जूनियरों को मिल सकती है कमान

post-img

देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था को पटरी पर लाने और कामकाज को गति देने के लिए बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादलों की तैयारी तेज हो गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, तबादलों के लिए तैयार किया गया प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिसे आगे की मंजूरी और अंतिम अनुमोदन के लिए विभागीय मंत्री के पास भेज दिया गया है। मंत्री स्तर से हरी झंडी मिलते ही कभी भी ट्रांसफर आदेश जारी किए जा सकते हैं। इस फेरबदल के तहत शिक्षा निदेशालय से लेकर जिलों तक के कई वरिष्ठ और मध्य स्तर के अधिकारियों को इधर से उधर किया जाना तय माना जा रहा है।

तबादलों की इस सुगबुगाहट के बीच शिक्षा विभाग में शीर्ष स्तर पर अधिकारियों की भारी कमी सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। आज सोमवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती अपनी सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त (Retire) हो रहे हैं। उनके रिटायर होते ही विभाग में शीर्ष स्तर पर वैक्यूम (खालीपन) पैदा होना तय है, क्योंकि प्रारंभिक शिक्षा निदेशक का पद पहले से ही लंबे समय से खाली चल रहा था और डॉ. सती ही इसका अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। इसके अलावा, उनके पास समग्र शिक्षा में अपर राज्य परियोजना निदेशक की भी जिम्मेदारी थी। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद विभाग में निदेशक के कुल तीन स्वीकृत पदों में से दो महत्वपूर्ण पद एक साथ खाली हो जाएंगे। विभाग में सिर्फ शीर्ष ही नहीं, बल्कि द्वितीय श्रेणी के प्रशासनिक पद भी खाली पड़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, विभाग में अपर निदेशक के कुल 10 पदों में से 5 पद रिक्त हैं। वहीं, संयुक्त निदेशक के स्वीकृत 23 पदों में से अधिकांश पर कोई स्थाई तैनाती नहीं है। इस गंभीर प्रशासनिक संकट को देखते हुए शासन स्तर पर मंथन चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि उच्च स्तर पर अधिकारियों की भारी कमी की वजह से इस बार कई जूनियर अधिकारियों की किस्मत चमक सकती है और उन्हें महत्वपूर्ण विभागों या जिलों में प्रभारी (In-charge) के रूप में बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। शिक्षा निदेशालय से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों की इस कमी के कारण कई महत्वपूर्ण नीतियां और शैक्षणिक योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। शिक्षक संगठनों का भी मानना है कि जब तक स्थाई तौर पर निदेशकों और अपर निदेशकों की नियुक्ति नहीं होती, तब तक विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त करना बड़ी चुनौती होगा। अब सभी की निगाहें विभागीय मंत्री के फैसले और आने वाली तबादला सूची पर टिकी हैं। इस बड़े फेरबदल के तहत न सिर्फ देहरादून मुख्यालय बल्कि विभिन्न जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों और जिला शिक्षा अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव होना तय है। शासन का प्रयास है कि रिक्त पड़े पदों पर जल्द से जल्द वैकल्पिक या स्थाई व्यवस्था कर आगामी सत्र और विभागीय योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके।