Jul 02, 2026

पिथौरागढ़ प्रशासन ने कहा: असुविधा के लिए खेद, लेकिन सुरक्षा के लिए आदि कैलाश यात्रा रोकना जरूरी

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देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून की आमद के साथ ही आफत की बारिश शुरू हो गई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बेहद खराब मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन पिथौरागढ़ ने एक बड़ा और एहतियाती कदम उठाया है। श्रद्धालुओं और वाहनों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विश्व प्रसिद्ध आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने यात्रा के लिए अनिवार्य रूप से जारी होने वाले इनर लाइन परमिट के निर्गमन को अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है।

जिला प्रशासन पिथौरागढ़ द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में साफ कहा गया है कि मानसून के सक्रिय होने के बाद से कुमाऊं के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है। इसके चलते भूस्खलन (लैंडस्लाइड), चट्टानें खिसकने और सड़कें अवरुद्ध होने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम सामान्य होने और नए आदेश जारी होने तक अपनी यात्रा की योजना को स्थगित रखें। लगातार हो रही बारिश के चलते कुमाऊं के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रशासनिक अमला पूरी तरह सतर्क है और मौसम की हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए है। गौरतलब है कि इस वर्ष आदि कैलाश यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा था। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई 2026 तक जारी किए गए पासों की संख्या 103 रही, जबकि वर्ष 2026 में अब तक कुल 52,441 इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके हैं। लेकिन मौसम के बदले मिजाज ने फिलहाल इस सफर पर ब्रेक लगा दिया है। "पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा के कारण जोखिम काफी बढ़ गया है। यात्रियों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे ऊपर है। स्थिति सामान्य होते ही यात्रा को दोबारा बहाल करने पर विचार किया जाएगा। मौसम विभाग ने राज्य में पहले ही एक जुलाई से लेकर चार जुलाई तक भारी बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, जिसका व्यापक असर अब पहाड़ी जिलों में साफ दिखने लगा है। रुद्रप्रयाग जिले में भारी बारिश के कारण गौरीकुंड पैदल मार्ग पर अचानक भारी मलबा आ गया। मलबे की चपेट में एक स्थानीय दुकान भी आ गई। गनीमत यह रही कि समय रहते सतर्कता बरतने के कारण इस हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। ऋषिकेश-केदारनाथ हाईवे: इस मुख्य मार्ग पर भी सफर बेहद खतरनाक हो गया है। हाईवे पर जगह-जगह पहाड़ियों से पत्थर गिर रहे हैं और कुछ स्थानों पर लैंडस्लाइड होने की वजह से केदारनाथ यात्रा भी प्रभावित हुई है। कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक हो रही इस झमाझम और भारी बारिश को देखते हुए सरकार और आपदा प्रबंधन की टीमें 24 घंटे नियंत्रण कक्ष से स्थिति की निगरानी कर रही हैं। यात्रियों से बार-बार अनुरोध किया जा रहा है कि वे सुरक्षित स्थानों पर ही रुकें और मौसम का अपडेट देखकर ही आगे बढ़ें।