Jun 28, 2026

उत्तराखंड मिशन 2027: बूथ की मजबूती से निकलेगा सत्ता का रास्ता, हैट्रिक के लिए बीजेपी तो वापसी के लिए कांग्रेस ने झोंकी ताकत

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देहरादून। उत्तराखंड में अगले साल 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश का सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, दोनों ने ही अपनी पूरी ताकत 'मिशन 2027' में झोंक दी है। जहाँ एक तरफ भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर राज्य में ऐतिहासिक हैट्रिक लगाने की जुगत में है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पिछले दस सालों का सूखा खत्म कर सत्ता में जोरदार वापसी का खाका खींच रही है। दोनों ही दलों के केंद्रीय और प्रांतीय महारथी उत्तराखंड के मैदान में उतरकर कार्यकर्ताओं के साथ रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस बार सत्ता का रास्ता 'पोलिंग बूथ' की मजबूती से होकर गुजर रहा है, जिस पर दोनों पार्टियों का सबसे ज्यादा फोकस है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के अनुसार, पार्टी अपने मजबूत संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं के दम पर हर चुनाव जीतती है। संगठन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र पोलिंग बूथ होता है, जिसे ध्यान में रखते हुए पिछले एक महीने से विशेष 'बूथ प्रबंधन' अभियान चलाया जा रहा है। शक्ति केंद्रों की बैठकें पूरी होने के बाद अब प्रत्येक बूथ स्तर पर बैठकें की जा रही हैं।

भविष्य के चुनाव को पूरी तरह बूथ केंद्रित बनाने के लिए 'बूथ टोली' को बेहद सशक्त और प्रभावी बनाया जा रहा है। इसके साथ ही विधानसभा और जिला स्तर पर कोर कमेटियों का गठन किया गया है, जो पार्टी के कार्यक्रमों को धरातल पर उतार रही हैं। आगामी दिनों में भाजपा युवा संवाद, पूर्व सैनिक सम्मेलन, महिला सम्मेलन और ओबीसी जातियों के सम्मेलनों के जरिए समाज के हर वर्ग को अपने साथ जोड़ने जा रही है। महेंद्र भट्ट का दावा है कि फरवरी 2027 या उससे पहले भी यदि चुनाव होते हैं, तो भाजपा पूरी तरह तैयार है और राज्य में प्रचंड बहुमत के साथ हैट्रिक लगाएगी। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी उत्तराखंड का दौरा कर इन तैयारियों को धार दी है। सत्ता में वापसी के लिए छटपटा रही कांग्रेस भी इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के मुताबिक, पार्टी पिछले पांच सालों से संगठन सृजन और पुनर्गठन के काम में लगी है। राज्य के सभी 27 संगठनात्मक जिलों और महानगरों में ब्लॉक स्तर को मजबूत किया जा चुका है। विधानसभा स्तर पर 'बूथ लेवल एजेंट' नामित किए जा चुके हैं, और अब बूथ कमेटियों के गठन के साथ बूथ अध्यक्षों की नियुक्ति की जा रही है। इस बार कांग्रेस ने राज्य को संगठनात्मक रूप से चार प्रमुख जोन में बांटा है। इन जोनों की कमान पार्टी के दिग्गज नेताओं प्रीतम सिंह, गणेश गोदियाल, हरक सिंह रावत और करण महरा को सौंपी गई है। इन चारों जोन के कार्यक्रमों में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य भी शामिल होकर कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे। कांग्रेस की रणनीति साफ है सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और राज्य सरकार की विफलताओं को जनता के बीच ले जाकर हमला बोलना। हाल ही में प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के राज्यव्यापी दौरे और मैराथन बैठकों ने इस रणनीति को और मजबूत किया है। साल 2027 का यह चुनाव दोनों ही दलों के लिए साख का सवाल है। जहाँ भाजपा के सामने अपनी सत्ता को बचाए रखने और सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकंबेंसी) से निपटने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस के सामने गुटबाजी से ऊपर उठकर लगातार दो बार की हार के सिलसिले को तोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी है। इसके अलावा, राज्य में सक्रिय क्षेत्रीय दल भी दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए तैयार बैठे हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि 'बूथ विजय' का यह फॉर्मूला किस दल को देहरादून के सिंहासन तक पहुंचाता है।